Vakrasana (वक्रासन)

वक्रासन करने का तरीका और होने वाले लाभ :
विधि: दण्डासन में बैठकर दायाँ पैर मोड़कर बायीं जंघा के पास घुटने से  सटाकर रखें (अथवा घुटने के ऊपर से दूसरी ओर भी रख सकते हैं), बायाँ  पैर  सीधा रहेगा | बायें  हाथ को दायें  पैर  एवं उदर के बीच  से लाकर  दायें  के पंजे के पास टिका दें, दायें  हाथ को कमर के पीछे भूमि पर सीधा रखकर गर्दन को घुमाकर दायीं ओर  कन्धे  के ऊपर से मोड़कर पीछे देखें  | इसी प्रकार दूसरी ओर  से भी अभ्यास करना 'वक्रासन' कहलाता है, इसे ४ से ६ बार क्र सकते हैं | 

 लाभ : 
१) कमर व कूल्हों की चर्बी को कम करता है | 
२) मधुमेह, यकृत व् तिल्ली के लिए विशेष लाभप्रद है | 
३) यह आसन कमर दर्द के लिए भी उपयोगी है | 
५) यह आसन गुर्दे को प्रभावित करता है तथा मेरुदण्ड  को लचीला बनाता   है | 


Vakrasana (वक्रासन) Vakrasana (वक्रासन) Reviewed by Laxman on October 10, 2018 Rating: 5

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